
किसान आदोंलन को एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है. अब तक किसानों के प्रदर्शन में शामिल 30 से ज्यादा किसान अपनी कुर्बानियां दे चुके हैं. यहां तक की किसानों के प्रदर्शन में अब उनके परिवार के लोग भी शामिल हो चुके हैं. क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या महिलाएं सब इस ठिठुरती बदन काटने वाली ठंड में किसानों के समर्थन में दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं. किसानों की सरकार के साथ अब तक की हुई बैठकों की बातचीत बेनतीजा रही हैं. किसानों का स्पष्ट कहना है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाए और एमएसपी (MSP) की गारटीं दी जाए.
आख़िर जिस बात के क़यास लगाए जा रहे थे ठीक उसी प्रकार किसानों के आदोंलन को कोई खालिस्तानी समर्थक बता रहा है तो कोई टुकड़े-टुकड़े गैंग का हितैषी बता रहा है...तो कोई किसानों को चाउमीन-पास्ता में बाटं रहा है।
क्या किसान चाउमीन-पास्ता नहीं खा सकते ?.
क्या किसान बोलेरो मर्सिडीज में नहीं चल सकता ?.
उन लोगों को एक बात ध्यान रखनी चाहिए कि यह साठ या सत्तर के दशक वाला किसान नहीं है जो फटे-पुराने कपडे पहने, टूटी-सिली हुई चप्पल पहने तभी वह किसान लगे।
बिडबंना तो यह है कि ऐसी बातें कोई और नहीं बल्कि सत्ताधारी पार्टी के नेता और मंत्री कह रहे हैं. मै ऐसे लोगों से पूछना चाहंता हूं कि भाजपा में शहनवाज और नकवी हैं तो भाजपा मुसलमानों की पार्टी हो गई?. भाजपा के दो बड़े नेता गुजराती हैं तो भाजपा गुजराती हो गई?. भाजपा में दो बड़े नेता मुकुल शर्मा और हेमतं बिस्वाशर्मा घोटाले के आरोपी हैं तो भाजपा घोटालेबाज़ पार्टी हो गई?. कई पार्टियों के माफिया और घोटालेबाज-भ्रष्टाचारी भाजपा में शामिल हो गए हैं तो क्या भाजपा भ्रष्टाचारी वाली पार्टी हो गई?. अगर आपको लगता है कि इन सबका जबाव ना है तो फिऱ एक-दो लोगों के बोलने से किसानों का आदोंलन खालिस्तानी-टुकड़े-टुकड़े गैैंंग का आदोंलन कैसे हो गया?. शाहीन बाग़ वाले एक-दो लोगों के होने से यह आदोंलन मुसलमानों का आदोंलन कैसे हो गया?.
दरअसल, यह कोई नई बात नहीं है बीते कई वर्षों में ऐसा देखने को मिला है कि आप सरकार के खिलाफ़ अपने हक़ के लिए आव़ाज उठाएंगे तो आपको देशद्रोही, खालिस्तानी समर्थक, टुकड़े-टुकड़े गैगं, चाऊमीन-पास्ता वगैरह-वगैरह में बाटं दिया जाएगा।
किसान आदोंलन का मामला जब सुप्रीम-कोर्ट में पहुंचा तो सरकार की तरफ से अटार्नी जनरल तुषार मेहता पेश हुए. माननीय सुप्रीम-कोर्ट ने जब उनसे पूछा कि आप यह बताइए कि किसानों के कितने सगठंन प्रदर्शन कर रहे हैं ? तो तुषार मेहता किसान सगंठनों के नाम बताने लगे लेकिन उन्होने एक बार भी यह नहीं कहा कि वहां पर खालिस्तानी, टुकड़े-टुकड़े गैगं, शाहीन बाग़ जैसे गैंगों का संगठन शामिल है. यहां पर एक बात स्पष्ट हो गई कि एजी साहब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी नहीं पढ़ते होगें।
आपको याद होगा सत्ता में आने से पहले कभी प्रधानमंत्री नरेद्रं मोदी खुद़ कहते थे कि 'जनआदोंलन के बिना लोकतांत्रिक देशों में परिवर्तन लाना असभंव है'. लेकिन आज प्रधानमत्रीं मोदी जी पूर्व प्रधानमंत्री की तरह चुप्पी साधे हुए हैं जैसे वो बाबा हो गए हैं एक दम शांत...!!

