Lucknow : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटबैंक को अपने पाले में करने को लेकर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के किसी भी अनुसूचित जाति जनजाति के व्यक्ति की हत्या होने पर उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के आदेश के बाद बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने कड़े तेवर अपनाए हैं। उन्होंने इसे वोट हासिल करने के जुगाड़ की साजिश बताते हुए अब तक ऐसा कदम नहीं उठाने पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही उन्होंने इस वर्ग से नीतीश सरकार के बहकावे में नहीं आने की अपील की है । मायावती ने शनिवार को ट्वीट किया कि बिहार विधानसभा आमचुनाव के पहले वर्तमान सरकार एक बार फिर एससी - एसटी वर्ग के लोगों को अनेक प्रलोभन, आश्वासन आदि देकर उनके वोट के जुगाड़ में है। जबकि अपने पूरे शासनकाल में इन्होंने इन वर्गों की घोर अनदेखी , उपेक्षा की और कुंभकरण की नीन्द सोते रहे , जिसके हिसाब - किताब का अब समय है
।1. बिहार विधानसभा आमचुनाव के पहले वर्तमान सरकार एक बार फिर एससी/एसटी वर्ग के लोगों को अनेकों प्रलोभन/आश्वासन आदि देकर उनके वोट के जुगाड़ में है जबकि अपने पूरे शासनकाल में इन्होंने इन वर्गों की घोर अनदेखी/उपेक्षा की व कुंभकरण की नीन्द सोते रहे, जिसके हिसाब-किताब का अब समय।1/2
— Mayawati (@Mayawati) September 5, 2020
उन्होंने कहा कि अगर बिहार की वर्तमान सरकार को इन वर्गों के हितों की इतनी ही चिन्ता थी तो उनकी सरकार अब तक क्यों सोई रही ? जबकि इनको इस मामले में उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार से बहुत कुछ सीखना चाहिए था। अतः इन वर्गों से अनुरोध है कि वे नीतीश सरकार के बहकावे में कतई न आयें।
2. अगर बिहार की वर्तमान सरकार को इन वर्गों के हितों की इतनी ही चिन्ता थी तो उनकी सरकार अबतक क्यों सोई रही? जबकि इनको इस मामले में यूपी की बसपा सरकार से बहुत कुछ सीखना चाहिए था। अतः इन वर्गों से अनुरोध है कि वे श्री नीतीश सरकार के बहकावे में कतई न आयें। 2/2
— Mayawati (@Mayawati) September 5, 2020
उल्लेखनीय है कि बिहार की राजनीति में आंकड़ों के हिसाब से अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग सत्ता तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका अदा करता है। राज्य में इस वर्ग के लगभग 16 प्रतिशत मतदाता हैं । ऐसे में नीतीश कुमार का यह कदम इस वर्ग को अपने पाले में करने की कोशिश के तहत देखा जा रहा है।
