प्रवासी मजदूरों को मिल रहा है दोहरा लाभ, रोजगार के साथ आशियाने का सपना हो रहा है सच, पढ़िए ऐसी ही परिवारों की दास्तां


इंदौर : इंदौर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। संभाग में अनेक जरूरतमंद व्यक्तियों के अपने आशियाने का सपना सच हो रहा है। ऐसे ही लोगों में मकान निर्माण के लिये उपयोग में लाई जाने वाली ईंट बनाने वाले इंदौर संभाग के खरगोन जिले की बड़वाह तहसील के बकावा गांव के बाबू बोखार, गुलाबचंद टंटु और देवराम ठाकुर भी शामिल है। इन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे भी अपना स्वयं का मकान बनाने के लिये ईंट का उपयोग कर सकेंगे। इन दिनों इन तीनों के पक्के मकान बनाने का काम अंतिम चरण में है। पक्के मकान का सपना प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हो रहा है और ये बेहद खुश हैं कि वे और उनका परिवार अब पक्का मकान में रहेगा। बरसात में पानी टपकने और भीगने के साथ सर्दी में ठंडी हवाओं से परेशानी नहीं होगी।

बकावा के ये तीनो प्रवासी मजदूर गुजरात के सूरत में ईंट के भट्टे पर काम करते थे। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इन्हें वर्ष 2019-20 के दौरान मकान का आवंटन हुआ था। बकावा ग्राम पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक पवन यादव ने बताया कि अप्रैल माह में जैसे ही हितग्राहियों के खाते में पहली किश्त (25 हजार रूपये) जारी हुई, ग्राम पंचायत से उन्हें सूचना दी गई कि वे गांव वापस आकर मकान का काम शुरू करें। उन्हें यह भी हिदायत दी गई कि वे आवंटित राशि का उपयोग केवल मकान बनाने में ही करें। उसी समय राज्य सरकार के प्रयासों से लाकडाऊन के कारण अन्य राज्यों में फंसे अन्य प्रवासी मजदूरों के साथ ये भी अपने गांव वापस आ गये और 14 दिन पृथकवास में रहने के बाद इन्होंने मकान बनाने का काम शुरू कर दिया। इस समय मकान का काम अंतिम चरण में है। श्री यादव ने बताया कि मकान बनाने के लिये मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी भी मिलती है। इसमें हितग्राही भी मकान बनाने का कार्य में मजदूरी कर सकते हैं।

ग्राम पंचायत बकावा में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक 68 आवास पूर्ण हो चुके हैं। वर्ष 2020-21 में 8 आवासों का आवंटन प्राप्त हुआ था जिसमें पांच आवास पूर्ण हो चुके हैं। शेष तीन का कार्य प्रगति पर है। ग्राम रोजगार सहायक पवन यादव ने बताया कि ग्राम बकावा में 450 जाब कार्डधारी हैं जिनमें से दस जाबकार्ड प्रवासी मजदूरों के हैं। उन्होने बताया कि ग्राम में 45 लाख रूपये की लागत की तीन खेत सड़कों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आने के कारण जब भी स्थित सामान्य होगी, इन सड़कों का निर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया जायेगा।

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