लेकिन ऐसे में कई लोगों को कलश स्थापित करने का सही तरीका व शुभ मुहूर्त नहीं पता होता और वह किसी भी समय कलश स्थापित कर देते हैं ऐसे में उन्हें मां की विशेष कृपा नहीं मिलती। इसलिए शुभ मुहूर्त और सही तरीके का पता होना बहुत आवश्यक है।
कलश स्थापना के लिए उपयुक्त सामग्री
कलश स्थापित करने में कुछ सामग्री का उपयोग होता है जैसे-
1.मिट्टी
2. 7 तरह के अनाज
3.जल या गंगाजल
4.कलावा
5.सुपारी, इलाइची,चन्दन,सिक्का
6.आम या अशोक के पत्ते
7.कच्चा साबुत चावल
8.जटा वाला नारियल
9.लाल कपड़ा
10.फूल और फूल माला इसके अलावा पीपल, जामुन, बरगद, अशोक और आम के पत्ते होने चाहिए। यदि सभी नहीं मिल पाते तो इनमें से किन्ही दो प्रकार के पत्ते आप ले सकते हैं।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
कलश स्थापना का मुहूर्त कलश की स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को की जाती है. इस बार प्रतिपदा रात्रि 09.08 तक रहेगी. कलश की स्थापना रात्रि 09.08 के पूर्व कर जाएगी. इसके चार शुभ मुहूर्त होंगे.
सुबह 07:30 से 09:00 तक
दोपहर 01:30 से 03:00 तक.
दोपहर 03:00 से 04:30 तक
शाम को 06:00 से 07:30 तक.
कलश स्थापना की विधि (Kalash Sthapana Vidhi)
- सबसे पहले एक पात्र लें। उस पात्र में मिट्टी बिछाएं। फिर पात्र में रखी मिट्टी पर जौ के बीज डालकर उसके ऊपर मिट्टी डालें।
- अब इसमें थोड़े-से पानी का छिड़काव करें। अब एक कलश लें। इस पर स्वस्तिक बनाएं।
- फिर मौली या कलावा बांधें। इसके बाद कलश को गंगाजल और शुद्ध जल से भरें।
- इसमें साबुत सुपारी, फूल और दूर्वा डालें। साथ ही इत्र, पंचरत्न और सिक्का भी डालें।
- इसके मुंह के चारों ओर आम के पत्ते लगाएं। कलश के ढक्कन पर चावल डालें।
- देवी का ध्यान करते हुए कलश का ढक्कन लगाएं। अब एक नारियल लेकर उस पर कलावा बांधें।
- कुमकुम से नारियल पर तिलक लगाकर नारियल को कलश के ऊपर रखें। नारियल को पूर्व दिशा में रखें।
- कलश पर स्वास्तिक का चिह्न जरूर बनाएं।
कलश स्थापना 2020 के लिए मंत्र
हाथ में जल और कुश लेकर निचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करें और पूजन सामग्री पर छीटें मारें।
गंगे! च यमुने! चैव गोदावरी! सरस्वति!
नर्मदे! सिंधु! कावेरि! जलेSस्मिन् सन्निधिं कुरु
किस दिन कौन सी देवी की की जाएगी पूजा
17 अक्टूबर : माँ शैलपुत्री पूजा,
18 अक्टूबर : द्वितीय , माँ ब्रह्मचारिणी पूजा,
19 अक्टूबरः तृतीया , माँ चंद्रघंटा पूजा,
20 अक्टूबरः चतुर्थी , माँ कुष्मांडा पूजा,
21 अक्टूबर : पंचमी , माँ स्कंदमाता पूजा ,
22 अक्टूबर : षष्टी , माँ कात्यायनी पूजा , माँ सरस्वती पूजा,
23 अक्टूबर : सप्तमी , माँ कालरात्रि पूजा,
24 अक्टूबर : दुर्गा अष्टमी , माँ महागौरी पूजा,
25 अक्टूबर : नवमी , विजय दशमी,
26 अक्टूबर : दशमी , दुर्गा विसर्जन,
